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इ सबइ सुलैमान क नीतिवचन (कहावतन) अहइ।एक बुद्धिमान पूत अपने बाप क आनन्द देत ह। मुला एकठु मूरख पूत, महतारी क दुःख देत ह।
बुराई स कमाए भए धन क खजाना हमेसा बियर्थ रहत हीं। जबकि धामिर्कता मउत स छोड़ावत ह। सत्य क मारग हम लगन क मउत स बचावत ह।
यहोवा कउनो भी नेक व्यक्ति क भूखा नाहीं रहइ देत ह। मुला दुट्ठ क लालसा पइ पानी फेरि देत ह।
सुस्त हाथ मनई क दरिद्र कइ देत ह, मुला मेहनती हाथ सम्पत्ति लिआवत हीं।
ग्रीस्मकाल मँ जउन उपज क बटोरके राखत ह, उहइ पूत बुद्धिमान अहइ; किन्तु जउन कटनी क समइ मँ सोवत ह उ पूत सर्मनाक होत ह।
नीक लोगन क मूँड़ पइ आसीसन क मुवुट होत ह मुला दुद्ठ क मुँह हिंसा स भरा होत ह।
नीक लोगन क यादगर आसीस होत ह, मुला दुट्ठ लोगन क नाउँ मिट जाहीं।
उ आग्या मानी जेकर मन विवेकसील अहइ, जबकि बववास मूरख नस्ट होइ जाइ।
विवेकवाला मनई सुरच्छित रहत ह, मुला टेंढ़ी चाल चलइवाले क भण्डा फूटी।
जउन बुरे इरादे स आँखी क इसारा करइ, तउ ओका ओहसे दुःख ही मिली। अउर बकवासी मूरख नस्ट होइ जाइ।
धमीर् व्यक्ति क मुँह तउ जिन्नगी क सोता अहइ, मुला दुट्ठ व्यक्ति क मँुहे हिंसा स भरा पड़त ह।
घिना वाद-विवाद क कारण अहइ। जबकि पिरेम सबइ अपराध क ढाँपि लेत ह।
बुद्धि क निवास हमेसा समुझदार ओंठन पइ होत ह, मुला जेनमाँ नीक बुरा क बोध नाहीं होत, ओकरे पिठिया पइ डंडा होत ह।
बुद्धिमान लोग, गियान क संचित करत रहेन, भुला मूरख क बाणी विपत्ति क बोलावत ह।
धनिक क धन, ओनकर मजबूत किला होत, दीन क दीनता पइ ओकर बिनास अहइ।
धमीर् मनइ क कमाई ओनका जिन्नगी प्रदान करत ह। मुला दुट्ठ मनइ आपन पाप बरे कीमत चुकावत ह।
उ जउन अनुसासन स सीखत ह उ दूसर क जिन्नगी क मारग बरे निदेर्स दे सकत ह। मुला उ जउन हिदायत क उपेच्छा करत ह अइसा मनई दूसर क भटकावा करत ह।
जउन मनई बैर पइ परदा डाए राखत ह, उ मिथ्यवादी अहइ अउर उ जउन निन्दा फइलावत ह, मूरख अहइ।
जियादा बोलइ स, कबहुँ पाप दूर नाहीं होत मुला जउन आपन जवान क लगाम देता ह, उहइ बुद्धिमान अहइ।
धमीर् क वाणी विसुद्ध चाँदी अहइ, मुला दुट्ठ क हिरदय क कउनो मोल नाहीं।
धमीर् जन क बातन चाँदी क नाई होत ह। मुला दुट्ठ मनइ क सुझाव क कउनो कीमत नाहीं होत ह।
यहोवा क वरदान स जउन धन मिलत ह, ओकरे संग उ कउनो दुःख नाहीं जोड़त।
बुरे आचार मँ मूरख क सुख मिलत ह, मुला एक समुझदार विवेक मँ सुख लेत ह।
जेहसे मूरख भयभीत होत ह ओका उहइ क कस्ट झेलइ क होइ। किन्तु एक धमीर् मनइ आपन इच्छा स आसिसित कीन्ह जाइ।
आँधी जब गुजरत ह, दुट्ठ उड़ जात हीं, मुला धमीर् लोग तउ सदा ही बिना हिले डुले खड़ा रहत हीं।
काम पइ जउन कउनो आलसी क पठवत ह, उ बन जात ह जइसे अम्ल सिरका दाँत क खटावत ह, अउर धुआँ आँखिन क तड़पावत दुःख देत ह।
यहोवा क भय उमिर बढ़ावत ह। मुला एक दुट्ठ मनई क उमिर तउ घट जात ह।
धमीर् क भविस्स आनन्द-उल्लास अहइ। मुला दुट्ठ क आसा तउ बियर्थ रहि जात ह।
इमानदार लोगन बरे यहोवा क मारग सरणस्थल अहइ; मुला जउन बुरा जन अहइँ, ओनकर इ बिनास अहइ।
धमीर् जन क कबहुँ उखाड़ा न जाइ, मुला दुट्ठ धरती पइ कबहुँ टिक नाहीं पाइ।
धमीर् क मुँहे स बुद्धि क धार बहत ह, मुला वुटिल जीभ क तउ काटिके लोकावा जाइ।
धमीर् क ओंठ जउन उचित अहइ जानत हीं, मुला दुट्ठ क मुँह बस वुटिल बातन बोलन ह।