Please Enter Bible Reference like John 3:16, Gen 1:1-5, etc
ezekiel - 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48
Bible Versions
तब उ मनई मोका बाहरी आँगन मँ लइ गवा जेकर सामना उत्तर क रहा। उ ओन कमरन मँ लइ गवा जउन मन्दिर स आँगन क आर-पार अउर उत्तर क भवनन क आर-पार रहेन।
उत्तर कइँती क भवन सौ हाथ लम्बा अउ पचास हाथ चउड़ा रहा।
हुआँ भीतरी आँगन क आगे बीस हाथ लम्बा खुला छेत्र अउर बाहरी आँगन क आगे पक्का गल्यारा रहेन। ओन भवनन पइ तीन तीन छज्जन रहेन। उ सबइ एक दूसर क आमने-समने रहेन।
कमरन क समन्वा एक बिसाल कच्छ रहा। उ भीतर पहोंचत रहा। इ दस हाथ चउड़ा, सउ हाथ लम्बा रहा। ओकर दरवाजन उत्तर कइँती रहेन।
ऊपर क कमरन जियादा पातर रहेन काहेकि छज्जत बीच अउ निजली मंजिल स जियादा जगह घेरे रही।
कमरन तीन मंजिलन पइ रहेन। बाहरी आँगन खम्भन क तरह ओनकर खम्भन नाहीं रहेन। एह बरे ऊपर क कमरन बीच अउ खाले क मंजिल क कमरन स जियादा पाछे रहेन।
बाहेर एक देवार रही। इ कमरन क समानान्तर रही। इ कमरन क समन्वा बाहरी आँगन तलक रहेन। इ पचास हाथ लम्बा रहा।
कमरन क कतार जउन कि बाहेरी आँगन कइँती गएन रहा पचास हाथ लम्बी रही। मन्दिर क समन्वा क कमरन क वुल लम्बाई सौ हाथ रहेन।
एन कमरन क निचे एक प्रवेसपथ रहा जउन बाहरी आँगन स होत भवा पूरब क लइ जात रहा।
पूरब क कइँती क आँगन क देवारन मँ, सटा भवा आँगन अउर भवन क आपने-सामेन कमरन रहेन।
हुआँ एक बिसाल कच्छ रहा। उ सबइ उत्तर क कमरन क नाईं रहेन। ओन सबइ क लम्बाइ अउ चउड़ाइ समान रहेन अउर उहइ तरह दरवाजन रहेन।
दविखन क कमरन क खाले एक दुआर रहा जउन पूरब कइँती जात रहा। इ बिसाल कच्छ मँ पहोंचावत रहा। दविखन क कमरन क आर-पार एक विभाजक देवार रही।
उ मनई मोहसे कहेस, “आँगन क आर-पार वाले दविखन क कमरन अउ उत्तर क कमरन पवित्तर कमरन अहइँ। इ सबइ ओन याजकन क कमरन अहइँ जउन यहोवा क बलि-भेंट चढ़ावत हीं। उ सबइ याजक एन कमरन मँ सबनत पवित्तर भेंट क खइहीं। उ पचे सब स जियादा पवित्तर भेंट क हुवाँ रखिहीं। काहेकि इ जगह पवित्तर अहइ। सब स जियादा पवित्तर भेंटन इ सबइ अहइँ: अन्न भेंट, पाप बरे भेंट अउर अपराध भेंट।
याजक पवित्तर छेत्र मँ प्रवेस करिहीं। किन्तु बाहरी आँगन मँ जाइ क पहिले उ पचे आपन सेवा-वस्त्र पवित्तर ठउर मँ रख देइहीं। काहेकि इ समइ वस्त्र पवित्तर अहइँ। जदि याजक चाहत ह कि उ मन्दिर क उ भाग मँ जाइ जहाँ दूसर लोग अहइँ तउ ओका ओन कमरन मँ जाइ चाही अउर दूसर वस्त्र पहिर लेइ चाही।”
उ मनई जब मन्दिर क बाहारी आगँन क नाप लेइ खतम कइ चुका, तउ उ मोका उ फाटक स बाहेर लिआवा जउन पूरब क रहा। उ मन्दिर क बाहेर चारिहुँकइँती नापेस।
उ मनई नापदण्ड स, पूरब क सिरा क नापेस। इ पाँच सौ छड़ लम्बा रहा।
उ उत्तर क सिरे क नापेस। इ पाँच सौ छड़ लम्बा रहा।
उ दविखन क सिरे क नापेस। इ पाँच सौ छड़ लम्बा रहा।
उ पच्छिम क तरफ चारिहुँ कइँती गवा अउर एका नापेस। इ पाँच सौ छड़ लम्बा रहा।
उ मन्दिर क चारिहुँ ओस स नापेस। देवार मन्दिर क चारिहुँ ओर गइ रही। देवार पाँच सौ छड़ लम्बी अउर पाँच सौ छड़ चउड़ी रही। इ पवित्तर स्थान क साधारण स्थान अलागावइ बरे हुवाँ रही।