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परमेस्सर मूसा स कहेस, “पवित्तर तम्बू क दस पर्दा स बनावा। इ परदन क बढ़िया सनीवाला अउ नीला, लाल अउर बैगनी कपरा स बनावा। कउनो कुसल कारीगर क चाही कि उ करूब सरगदूत क पखना क संग पर्दन प कढ़ाई करइ।
हर एक पर्दा अट्ठाइस हाथ लम्बा अउ चार हाथ चौड़ा होइ चाही। अउर हर कनात क नाप बराबर होइ चाही।
सब पर्दन क दुइ समूह मँ सिआ। पहिले हींसा मँ पाँच पर्दन क एक संग अउ दूसर हींसा मँ पँच पर्दन क एक संग सी द्या।
आखिरी क पर्दा क सिरे क नीचे फन्दा बनावा। इ फन्दन क बनवइ बरे नीला कपरा लगावा। दुसरे समूह क पर्दन क आखरी पर्दा मँ भी उहइ काम करा।
पहिले अउ दुसरे समूह क पर्दन क आखिरी पर्द मँ पचास फन्दा बनवा। फन्दा एक दुसरे फन्दा क आमने सामने होइ चाही।
तब पचास सोना क हुक पर्दन क एक संग मिलवइ बरे बनावा। इ पर्दन क एक दुसरे क संग हुक स इ तरह जोरिहीं कि पुरा पवित्तर तम्बू एक ही होइ जाइ।
“तब तू दूसर तम्बू बनउब्या जउन पवित्तर तम्बू क ढाकि लेइ। इ तम्बू बरे ग्यारह पर्दन बइपरा। इ परदन क बोकरी क बारे स बनावा।
इ सबहिं पर्दा नाप मँ एक बराबर होइ चाही। उ सबहिं तीस हाथ लंबा चार हाथ चौड़ा होइ चाही।
पाँच ठु पदेर्े क एक समूह मँ जुड़वावा अउ फुन दुसर छ: पदेर् क एक दुसर समूह मँ जुड़वावा। छठे पदेर् क आधे हींसा क तम्बू क समन्वा ऊपर मोड़ि द्या।
एक समूह क आखिरी पर्दा क छोर प पचास फन्दा बनवा अइसा ही दूसरे समूह क आखिरी पर्दा क छोरा प भी पचास फन्दा बनावा।
तब काँसे क पचास फन्दा बनवा। इ काँसे क फन्दा क प्रयोग तम्बू क परदन क एक साथे जोरइ बरे करा। इ सबइ तम्बू क एक संग जोरइ क एक एकाई क रूप मँ बनिहीं।
तम्बू क आखरी पदेर् क आधा हींसा तम्बू क पीछे क किनारे लटका रही।
तम्बू क किनारन मँ इ तम्बू क पर्दा पवित्तर तम्बू क पेंदी स एक हाथ नीचे लटकत रही। तउ इ तम्बू पवित्तर तम्बू क पूरी तरह ढाँकि लेइ।
बाहेर क तम्बू क ढाकइ बरे दुइ पर्दा बनवा। एक पर्दा लाल रंग स रंगी भइ भेड़ा क खाल स बनइ चाही अउ दूसर पर्दा उत्तम खाल सुइसों क बनी होइ चाही।
“पवित्तर तम्बू क सहारा देइ बरे बबुरे क काठ क तखता क प्रयोग करा।
तखता दस हाथ ऊँचा अउ डेढ़ हाथ चौ़ड़ा होइ चाही।
हर तखता क तले मँ ओनका जोड़इ बरे एक दूसरे प धरइ बरे दुइ खूँटी होइ चाही। पवित्तर तम्बू क हर एक तखता बरे इहइ करा।
पवित्तर तम्बू क दक्खिन कइँती बीस तखता क प्रयोग करा।
बीस तखता बरे चाँदी क चालीस आधार बनावा। हर एक ढाँचा नीचे चाँदी क दुइ आधार एका दुइ खम्भा बरे होइ चाही।
पवित्तर तम्बू क उत्तरी हींसा बरे बीस तखता अउर ल्या।
इ तखता बरे चालीस कुसिर्यन क बनवावा हर एक तखता क नीच बरे दुइ आधार होई चाही।
तोहका पवित्तर तम्बू क पच्छिउँ छे बरे छ: अउर तखता लइ चाही।
पवित्तर तम्बू क पाछे कोना बरे दुइ तखता ल्या।
कोने क दुइनउँ तखता क नीचे एक साथ जोरि द्या। ऊपरी छल्ला दुइनउँ तखतन क एक कइके जोड़ी। दुइनउ कोन बरे उहइ करा।
इ तरह सब मिलिके आठ ठु तखता पवित्तर तम्बू के पच्छिउँ छोर बरे होइहीं। हर तखता क नीचे दुइ कुसीर् होइस चाँदी क सोलह कुसीर् होइहीं।
“बबुरे क काठ बइपरा अउ पवित्तर तम्बू क तखता बरे बेड़ा बनवा। पवित्तर तम्बू क एक कइँती क हींसा क तखता बरे पाँच बेड़ा बनवा।
अउ पवित्तर तम्बू क दूसर हींसा क तखता बरे पाँच अउर बेड़ा होइहीं। अउर पवित्तर तम्बू क पाछे क तखता बरे पाँच बेड़ा होइहीं
बीच क बेंड़ा फरेम एक सिरा स दूसर सिरा तलक पहोंचइ चाही।
“तखतन क सोने स मढ़ा। अउ तखतन क बेड़न क फँसावइ बरे छल्ला बनवा। इ छल्ला भी सोने क होइ चाही। बेड़े क सोने स मढ़ा।
पवित्तर तम्बू क तू अहइ तरह क बनवा जइसा मइँ तोहका पहाड़े प देखाए रहेउँ।
“बढ़िया सनी क बइपरा अउ पवित्तर तम्बू क भीतर भाग बरे एक खास पर्दा बनावा। इ पर्दा क नीला, बैगनी अउ लाल ओढ़ना स बनवा। करूब सरगदूत क तस्बीर कपरा मँ काढ़ा।
बबुरे क लकड़ी क चार खंभा बनावा। खम्भन क सोने स मढ़ द्या। चारिहुँ खम्भन प सोने स बना हुकन लगावा। खम्भन की नीचे चाँदी क चार आधार लगावा। तउ सोने क हुक मँ पर्दा टाँगा।
पर्दा क सोने क हुक क नीचे टाँगा, अउ करार क संदूखे क पर्दा क पाछे धरा। इ पर्दा पवित्तर ठउर क सब ते जिआदा पवित्तर ठउर क अलगाइ देइ।
सबते जिआदा पवित्तर ठउर मँ करार क संदूखे प ढकना राखा।
“पवित्तर ठउर मँ पर्दा क दुरसे कइँती खास मेज क धरा। मेज पवित्तर तम्बू क उत्तर मँ होइ चाही। तब डीबट क पवित्तर तम्बू क दखिन मँ राखा। डीबट मेज क ठीक समन्वा होइ।
“तब पवित्तर तम्बू क दुआर बरे एक पर्दा बनावा। इ पर्दा क बनवइ बरे नीला, बैगंनी, लाल उत्तिम सन क कपरा क बइपरा। अउर कपरा मँ तस्बीर क बुन द्या।
दुआरे क पर्दा बरे सोना क हुक बनवा। सोना स मढ़ा बबुरे क काठे क पाँच खम्भा बनवा। अउ पाँचउ खम्भा बरे काँसे क पाँचे कुसीर् ढलवाइ ल्या।”